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Wednesday, 26 May 2021

Shayari: 'रगों में ज़हर-ए-ख़ामोशी उतरने से ज़रा पहले', शायरों के कलाम और गुनगुनाते अल्‍फ़ाज़

Shayari: शेरो-सुख़न (Urdu Shayari) की दुनिया में अल्‍फ़ाज़ के मोती बिखरे मिलते हैं. इसमें कहीं दिलों के ख़ूबसूरत जज्‍़बात पिरोए गए हैं, तो कहीं ख़ामोशी में भी अल्‍फ़ाज़ गुनगुनाते महसूस होते हैं...

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