कैफी आजमी सिर्फ अपनी नज़्मों तक ही प्रगतिशील नहीं बल्कि अपनी ज़िंदगी में भी उतना ही प्रोग्रेसिव रहे. नज्मों के लिखने वाले शायर ने अमीरी-गरीबी के अंतर को मिटाने की बात की, पुरुषों और महिलाओं को सामान दर्जा देने की बात की.from Latest News लाइफ़ News18 हिंदी https://ift.tt/38at4fT
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