
आत्महत्या समाज में उन विषयों की सूची में है, जिन पर खुलकर बात करने का चलन नहीं है. हालिया मामलों से सवाल खड़ा होता है कि अगर खुदकुशी के खयालों यानी सुसाइडल थॉट्स के संकेतों को समझा जाता, तो क्या ये घटनाएं रोकी जा सकती थीं?
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